मेरा किरदार मेरा किरदार क्या हैं?, इस संसार में, क्या कोई बता सकता हैं?, पर मुझे नहीं लगता, कोई बता सकता हैं, काश! कोई बता सकता, तो मैं किसी को कह सकता, मेरा किरदार किरदार नहीं, वो कुछ बढ़ कर हैं, जो मुझसे जुड़ा हैं, मुझमें समाया हैं, मेरे रग-रग में बसा हैं, पर फिर भी, मेरा किरदार आखिर क्या हैं?, ये कोई नहीं समझ पाया, ना जान पाया, अपने किरदार के रूप में, मैं जन्मा और ये जन्म मेरे किरदार का। ,,,,,?