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Showing posts from November, 2020

दिल का ज़हर

  एक सांस भी ना ले सकूँ और मौत भी ना आएं,  ना रात को सो सकूँ, ना सुबह को जागू,  दोनों हाथों को सीने से लगाए, अपने दिल के दर्द को संभालू,  रोते हुए, नाम उसका लेते हुए, तस्वीरों को देखते हुए,  ये ज़हर मिला है मुझे, उसके होते हुए।     ज़हर का एक बूंद भी ना हो, ना एक कतरा हो,  ना जाने फिर भी, ये कैसा ज़हर है, जो हर पल मेरे शरीर में बसा रहता है,  ना मौत देता है ना जीने देता है, मुझे कैद करता है,   एक बंद दरवाज़े के पीछे,  जो कभी खुलता नहीं,  जिसका कोई तोड़ नहीं मिलता,  वो ज़हर! हमेशा मुझे दर्द देता है,  वो कहर! कयामत का कहर होता है,  दिल का ज़हर, बस दिल का ज़हर होता है।