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Showing posts from July, 2020

मेरा प्‍यार

मेरा प्‍यार मैं बस मैं हूँ कोई और नहीं, तेरे लिये,  अकेला ही सही, अंधेरा हैं छाया हैं धूप हैं, चाहें जैसा भी हैं,  फिर क्‍यों रोया हुआ मेरा चेहरा,  आंखों में सिर्फ, बूँदों का ही पहरा,  कहने को बहुत कुछ, पर फिर भी दिल चुप,  खामोश, निराश, हताश,  आज कदम अल्फाज रूके, तेरे क्रब पे ठहरे, यादों में सिर्फ तुम मेरे, सो जाना हर रात मेरी बाहों में, पनाहों में,   कर लेना मुझे प्‍यार इस तरह, जैसे मिले हो पहली बार की तरह,   मैं बस मैं हूँ कोई और नहीं, बस तेरे लिये,  अकेला ही सही, अंधेरा हैं छाया हैं धूप हैं, चाहें जैसा भी हैं,  पहचान लेना हमेशा मुझे, अपनी दिल की धड़कनो से, मेरे दिल की धड़कनो को,  क्‍या हुआ, अगर हम एक जहान में नहीं, तो मेरा प्‍यार भी तेरे लिये कम नहीं,   मेरा प्‍यार बढ़ता हैं हर रोज बढ़ता हैं और बढ़ता ही जाता हैं, सिर्फ तेरे लिये।  मेरा प्‍यार। हम मिलेंगे दोबारा कहीं पे एक साथ।

मेरा नशा

मेरा नशा  मुझे नहीं मिलता, वो नशा, उस शराब में,  जो मैं चाहता हूँ, मुझे तो,  किसी और का नशा लगता हैं,  वो आलम ही, मेरा नशा हैं, सुकून है,  तन्हाईयों का, मेरा सहारा,  जिसमें, मैं झूमता हूँ, गाता हूँ, मदहोश रहता हूँ,  मुझे नहीं मिलता, वो नशा, उस शराब में, जो मैं चाहता हूँ,   मैं प्यासा सा दरिया हूँ, उसका मारा हूँ,  जब तक दो-चार, घूट ना ले लूं,  आव़ारा सा गलियों में फिरता हूँ,  मुझे नहीं मिलता, वो नशा, उस शराब में, जो मैं चाहता हूँ,   मेरा नशा तो कुछ ऐसा हैं, जो सर चढ़ के बोलता हैं, ना किसी से डरता हैं, आज़ाद बेखौफ जीता हैं और जीना सिखाता हैं, मेरा नशा वो कलम हैं,     क्या हैं कोई ऐसा नशा?, मेरे नशे से बेहतर, मेरा नशा तो कुछ ऐसा ही हैं, जिसके बिना, मैं में नहीं कोई और हूँ, मुझे नहीं मिलता, वो नशा, उस शराब में, जो मैं चाहता हूँ। पहचान नशा तो बस एक नशा हैं, चाहे वो जैसा भी हो।