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Showing posts from April, 2024

कामना, मोह, लाभ, क्रोध

 मैं कामना करता हूँ  या फिर उसके प्रति मोह रखता हूँ  लाभ का अति प्रतिशत चाह देखता हूँ  पर उस चाह में क्रोधित होता हूँ   बुद्धि का विनाश करता हूँ  सोच समझ की बातों से वंचित रहता हूँ  ना समझी में, अपने जीवन का आधार ही बदल लेता हूँ  जीवन क्या है? ये मैं भूल ही जाता हूँ  अग्नि के उस कुण्ड में  अपना देह संस्कार कर लेता हूँ 

तेरे ना होने पर

  जो ये मेरी ऑंखेंं है  वो इस कदर रोती है  जब-जब तेरा ख्याल मेरे जहन में आता है  ऐसी क्या गलती थीं मेरी  अगर थीं भी तो  एक बार आकर, मुझे, कहना तो था  क्या मैं तेरे लिए, इतना पराया था  जो तुने मुझे एक बार भी  अपना ना समझा  आज इस वक्त, तेरे ना होने पर  अब, मैं क्या कहुँ?  मेरे पास अब कुछ नहीं है कहने को 

मेरे कुछ शब्द

मैंने अपने शब्द कहें  शब्दों से ऐसी बात की  लब्ज उनके रूकें  शब्द उनके ठहरे  मतलब मेरे शब्दों का निकला  सुनना उनकों पड़ा  मैं हर पल अपने शब्दों में कहता रहा  आंखों में आंसू उनके गिरते रहें      मैं जज्बात भरे अल्फाजो में सुनाता रहा  दर्द उन्हें भी होता दर्द मुझे भी होता  जो था किस्सा मेरा  मैं उसे बताता था  मेरे शब्द थे  सब को सुनाता था  एक-एक शब्दों का अर्थ समझाता था  कहीं कोई छूट ना जाए  इसीलिए फिर से दोहराता था  मैं ऐसा था मैं ऐसा ही हूँ  मैं अपने शब्दों से प्यार करता हूँ  तभी तो उन्हें निखारता हूँ  सुंदर से शब्दों में लिख कर  कविताओंं में दर्शाता हूँ  मैं अपने शब्दों को  भली भात्ति जान कर  जज्बातों से मेहसूस कर  मैं उन्हें इस कदर बनाता हूँ  वो मरते हुए भी जीते हैं    हर किसी के लब्जों में रहते हैं  मेरे शब्द कुछ ऐसे ही होते हैं  

एक दिन मैंने सोचा

मेरा था मैं कुछ ऐसा करूं  या वैसा करूं  पर मन मैं सवाल था  आखिर मैं क्या करूं?  सोच विचार के मैंने ये सोचा  चलो मैं ये करूं  ठीक हैं बेहतर हैं अच्छा है  मेरे लिये सरल सही तरीका है  नाम भी अपना काम भी अपना  जो चाहे वो करो  हर दिन हैं अपना  माना काम थोड़ा ज्यादा है  पर अपना है  किसी को कुछ नहीं कहना हैं  बस अपने काम में  हर दिन लगे रहना है  पर कुछ ऐसा लगे  किसी और को समय देना जरूरी है  तो समय सारणी के दिशा अनुरूप  अपने समय को बदल लेना हैं  लेकिन हर दिन प्रतिदिन   अपने काम में लगे रहना है  मैंने जो सोचा हैं उसे पाना भी तो है  धीरे ही सही अपनी सोच के अनुरूप  मुझे चलना है  तो क्या है फ़िक्र  अपनी जिंदगी में हमेंशा  मस्त रहना हैं  बेफ़िक्री की चिंता नहीं करना  अपने जीवन को अंतिम सांसों तक जीना  जब तक इस शरीर में जान  जो चाहें वो करों  हर दिन हैं अपना  इसे क्यों हैं नष्ट करना  आखिर ये प्यारी जिंदगी है  इसे खुल कर, हर...