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एक दिन मैंने सोचा


मेरा था मैं कुछ ऐसा करूं 

या वैसा करूं 

पर मन मैं सवाल था 

आखिर मैं क्या करूं? 

सोच विचार के मैंने ये सोचा 

चलो मैं ये करूं 

ठीक हैं बेहतर हैं अच्छा है 

मेरे लिये सरल सही तरीका है 

नाम भी अपना काम भी अपना 

जो चाहे वो करो 

हर दिन हैं अपना 

माना काम थोड़ा ज्यादा है 

पर अपना है 

किसी को कुछ नहीं कहना हैं 

बस अपने काम में 

हर दिन लगे रहना है 

पर कुछ ऐसा लगे 

किसी और को समय देना जरूरी है 

तो समय सारणी के दिशा अनुरूप 

अपने समय को बदल लेना हैं 

लेकिन हर दिन प्रतिदिन 

 अपने काम में लगे रहना है 

मैंने जो सोचा हैं उसे पाना भी तो है 

धीरे ही सही अपनी सोच के अनुरूप 

मुझे चलना है 

तो क्या है फ़िक्र 

अपनी जिंदगी में हमेंशा 

मस्त रहना हैं 

बेफ़िक्री की चिंता नहीं करना 

अपने जीवन को अंतिम सांसों तक जीना 

जब तक इस शरीर में जान 

जो चाहें वो करों 

हर दिन हैं अपना 

इसे क्यों हैं नष्ट करना 

आखिर ये प्यारी जिंदगी है 

इसे खुल कर, हर पल हैं जीना।  


मैंने जो सोचा, जाना और जो में कर रहा हूँ उसे मैंने अपनी इस कविता में लिखा है या यूं कह लो ये मेरा एक जीवन ही हैं। जिसके कुछ पल मुझे लिखने के लिये प्रेरित करते है और मैं लिखता हूँ क्योंकि मैंने बहुत कुछ देखा हैं ओर जाना है इसलिये ये मेरा अनुभव है। 

लिखने में कुछ गलतियां हो तो मुझे इसके लिये माफ करें। धन्यावाद मेरी कविता पढ़ने के लिये।   

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