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मेरे कुछ शब्द


मैंने अपने शब्द कहें 

शब्दों से ऐसी बात की 

लब्ज उनके रूकें 

शब्द उनके ठहरे 

मतलब मेरे शब्दों का निकला 

सुनना उनकों पड़ा 

मैं हर पल अपने शब्दों में कहता रहा 

आंखों में आंसू उनके गिरते रहें 

    मैं जज्बात भरे अल्फाजो में सुनाता रहा 

दर्द उन्हें भी होता दर्द मुझे भी होता 

जो था किस्सा मेरा 

मैं उसे बताता था 

मेरे शब्द थे 

सब को सुनाता था 

एक-एक शब्दों का अर्थ समझाता था 

कहीं कोई छूट ना जाए 

इसीलिए फिर से दोहराता था 

मैं ऐसा था मैं ऐसा ही हूँ 

मैं अपने शब्दों से प्यार करता हूँ 

तभी तो उन्हें निखारता हूँ 

सुंदर से शब्दों में लिख कर 

कविताओंं में दर्शाता हूँ 

मैं अपने शब्दों को 

भली भात्ति जान कर 

जज्बातों से मेहसूस कर 

मैं उन्हें इस कदर बनाता हूँ 

वो मरते हुए भी जीते हैं   

हर किसी के लब्जों में रहते हैं 

मेरे शब्द कुछ ऐसे ही होते हैं  

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