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तेरे ना होने पर

 

जो ये मेरी ऑंखेंं है 

वो इस कदर रोती है 

जब-जब तेरा ख्याल मेरे जहन में आता है 

ऐसी क्या गलती थीं मेरी 

अगर थीं भी तो 

एक बार आकर, मुझे, कहना तो था 

क्या मैं तेरे लिए, इतना पराया था 

जो तुने मुझे एक बार भी 

अपना ना समझा 

आज इस वक्त, तेरे ना होने पर 

अब, मैं क्या कहुँ? 

मेरे पास अब कुछ नहीं है कहने को 


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