पिता और बेटा
( एक सोच )
'पिता और बेटा, घर से दोनाें साथ में मिल कर घूमने निकले। बेटे की उम्र लगभग 8 साल की हैं जो अभी कुछ ज्यादा नहीं जानता था। जितना उसने देखा, समझा। बस उतना ही।
दोनों मिल कर साथ में, बाते करते हुए। सुन्दर सी धारा को देखने निकले। जो बरसात के समय में, देखने के लिये एक अद्भुत द्रश्य हैं। पिता अपने बेटे को ये दिखाने ले जा रहा था। पर रास्ते में, उन्हें एक बूढ़ी वृध्द महिला दिखी। जिसकी उम्र लगभग 70 से 80 साल के बीच की होगी। तो इसी बीच, पिता उस बूढ़ी वृध्द महिला के पास जाता है। और अपने जेब से, एक हजार रूपये (1,000) निकाल कर, उस बूढ़ी वृध्द महिला को दे देता है। वृध्द महिला, उस पिता को, ढ़ेर सारी शुभ कामनाएं देती हैं।
बेटा ये देख, अपने पिता से पूछता हैं।? पापा जी, आपने उस दादी जी को, इतने सारे पैसे क्यों दे दिये।? वो भी बिना मांगे। जब चाचा आपसे पैसे मांगते हैं। तो आप उन्हें नहीं देते हैं। ऐसा क्यों।?
तुम्हारें चाचा तो कमा कर खा सकते हैं। पर वो दादी कमा कर नहीं खा सकती है। अब वो बूढ़ी हो चुकी है। वो तो इस आश में बैठी रहती है। कि मालिक मेरी मदद करेंगा। तो हम अच्छे इंसान ही है। जो मालिक के भेजे हुए, एक रूप हैं। जो उनकी मदद करते हैं।
अब तुम्हें मेरी बातों का मतलब समझ में आया गया।
जी पापा जी।
'वैसे, अगर तुम्हारे चाचा को, मेरी मदद की जरूरत पड़ेगी। तो मैं, मदद करने के लिये, हमेशा तैयार हूँ। पर अभी, वो वक्त नहीं आया हैं। इसी लिये, मैं मना कर देता हूँ। ताकि वाे अपनी मेहनत से करे।
'लेकिन, अगर तुम्हें किसी की, मदद करनी हैं। तो पहले, तुम्हें कुछ बनना पड़ेगा। तभी तुम दूसरों की मदद कर पाओगे। ये मेरी बात याद रखो।
जी पापा जी।
'लो, हम नदी भी पहुंच गये। बातें करते हुए, पता ही नहीं चला। कब नदी पहुंच गये।
बेटा ये देख, अपने पिता से पूछता हैं।? पापा जी, आपने उस दादी जी को, इतने सारे पैसे क्यों दे दिये।? वो भी बिना मांगे। जब चाचा आपसे पैसे मांगते हैं। तो आप उन्हें नहीं देते हैं। ऐसा क्यों।?
तुम्हारें चाचा तो कमा कर खा सकते हैं। पर वो दादी कमा कर नहीं खा सकती है। अब वो बूढ़ी हो चुकी है। वो तो इस आश में बैठी रहती है। कि मालिक मेरी मदद करेंगा। तो हम अच्छे इंसान ही है। जो मालिक के भेजे हुए, एक रूप हैं। जो उनकी मदद करते हैं।
अब तुम्हें मेरी बातों का मतलब समझ में आया गया।
जी पापा जी।
'वैसे, अगर तुम्हारे चाचा को, मेरी मदद की जरूरत पड़ेगी। तो मैं, मदद करने के लिये, हमेशा तैयार हूँ। पर अभी, वो वक्त नहीं आया हैं। इसी लिये, मैं मना कर देता हूँ। ताकि वाे अपनी मेहनत से करे।
'लेकिन, अगर तुम्हें किसी की, मदद करनी हैं। तो पहले, तुम्हें कुछ बनना पड़ेगा। तभी तुम दूसरों की मदद कर पाओगे। ये मेरी बात याद रखो।
जी पापा जी।
'लो, हम नदी भी पहुंच गये। बातें करते हुए, पता ही नहीं चला। कब नदी पहुंच गये।
(( पहचान ))
सुन्दर चित्रण हैं !
ReplyDeleteआप मेरे ब्लॉग पर विजिट कर सकते हैं यदि आपको लोन और फाइनेंस की जानकारी चाहिये !
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