मौत
(क्षण भर का एहसास)
मैंने मरते देखा, अपने ख़्वाबों में,
अपने आप को, अपनी आँखों के सामने,
शरीर हैं ज़मीन पर, रूह हैं उसके ऊपर,
मैं इस कदर अनजान हूँ, जिसका कोई पता नहीं,
लापता, अपनी ही दुनिया से,
विमुक्त एक काया, मौत अंधकार हैं,
जिसके आगे, कुछ भी दिखाई नहीं देता,
मैं उस अंधकार से, लौट कर आया हूँ,
ये क्षण भर का एहसास हैं, जो मृत्यु का एक पहलू ,
एक गहराई, जो ये बयां करती हैं,
मौत क्या हैं।
पहचान
Comments
Post a Comment